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दोहा 9

9.1

चौपाई

प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।
आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।
जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।।
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।

9.2

दोहा/सोरठा

राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।
लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि ॥8॥

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