ग्रंथश्रीरामचरितमानसअयोध्याकाण्डदोहा 7676.3श्रीरामचरितमानस 76.3मातु चरन सिरु नाइ चले तुरत संकित हृदयँ। बागुर बिषम तोराइ मनहुँ भाग मृगु भाग बस ॥75॥पिछलापूरा अध्याय