Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 70.1

लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।
राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।।
तब जानकी सासु पग लागी। सुनिअ माय मैं परम अभागी।।
सेवा समय दैअँ बनु दीन्हा। मोर मनोरथु सफल न कीन्हा।।
तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू। करमु कठिन कछु दोसु न मोहू।।
सुनि सिय बचन सासु अकुलानी। दसा कवनि बिधि कहौं बखानी।।
बारहि बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही।।
अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा।।

पूरा अध्याय