ग्रंथश्रीरामचरितमानसअयोध्याकाण्डदोहा 5151.3श्रीरामचरितमानस 51.3सखिन्ह सिखावनु दीन्ह सुनत मधुर परिनाम हित। तेइँ कछु कान न कीन्ह कुटिल प्रबोधी कूबरी ॥50॥पिछलापूरा अध्याय