ग्रंथश्रीरामचरितमानसअयोध्याकाण्डदोहा 3535.2श्रीरामचरितमानस 35.2देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ। कहत परम आरत बचन राम राम रघुनाथ ॥34॥पिछलापूरा अध्याय