ग्रंथश्रीरामचरितमानसअयोध्याकाण्डदोहा 3232.2श्रीरामचरितमानस 32.2लोभु न रामहि राजु कर बहुत भरत पर प्रीति। मैं बड़ छोट बिचारि जियँ करत रहेउँ नृपनीति ॥31॥पिछलापूरा अध्याय