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श्रीरामचरितमानस 239.2

पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर।
मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर ॥238॥

पूरा अध्याय