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श्रीरामचरितमानस 140.2

-छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु।
करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु ॥139॥

पूरा अध्याय