ग्रंथश्रीरामचरितमानसअयोध्याकाण्डदोहा 127127.3श्रीरामचरितमानस 127.3राम सरुप तुम्हार बचन अगोचर बुद्धिपर। अबिगत अकथ अपार नेति नित निगम कह ॥126॥पिछलापूरा अध्याय