ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 8686.3श्रीरामचरितमानस 86.3धरी न काहूँ धिर सबके मन मनसिज हरे। जे राखे रघुबीर ते उबरे तेहि काल महुँ ॥85॥पिछलापूरा अध्याय