ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 7878.2श्रीरामचरितमानस 78.2पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु। गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु ॥77॥पिछलापूरा अध्याय