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श्रीरामचरितमानस 72.2

प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।
पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान ॥71॥

पूरा अध्याय