ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 5858.3श्रीरामचरितमानस 58.3क।। जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि। बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि ॥57॥पिछलापूरा अध्याय