ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 5757.2श्रीरामचरितमानस 57.2परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु। प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु ॥56॥पिछलापूरा अध्याय