ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 354354.2श्रीरामचरितमानस 354.2चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ। कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ ॥353॥पिछलापूरा अध्याय