ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 346346.2श्रीरामचरितमानस 346.2दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी। प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि ॥345॥पिछलापूरा अध्याय