ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 345345.2श्रीरामचरितमानस 345.2बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि। सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि ॥344॥पिछलापूरा अध्याय