ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 343343.2श्रीरामचरितमानस 343.2मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस। भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस ॥342॥पिछलापूरा अध्याय