Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 336.2

रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।
करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु ॥335॥

पूरा अध्याय