ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 327327.6श्रीरामचरितमानस 327.6पुनि पुनि रामहि चितव सिय सकुचति मनु सकुचै न। हरत मनोहर मीन छबि प्रेम पिआसे नैन ॥326॥पिछलापूरा अध्याय