ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 323323.3श्रीरामचरितमानस 323.3सोहति बनिता बृंद महुँ सहज सुहावनि सीय। छबि ललना गन मध्य जनु सुषमा तिय कमनीय ॥322॥पिछलापूरा अध्याय