ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 318318.3श्रीरामचरितमानस 318.3सजि आरती अनेक बिधि मंगल सकल सँवारि। चलीं मुदित परिछनि करन गजगामिनि बर नारि ॥317॥पिछलापूरा अध्याय