ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 315315.2श्रीरामचरितमानस 315.2सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु। हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु ॥314॥पिछलापूरा अध्याय