ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 305305.2श्रीरामचरितमानस 305.2आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान। सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान ॥304॥पिछलापूरा अध्याय