ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 33.2श्रीरामचरितमानस 3.2सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग ॥2॥पिछलापूरा अध्याय