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श्रीरामचरितमानस 296.2

जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।
चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के ॥295॥

पूरा अध्याय