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श्रीरामचरितमानस 287.2

तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।
बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु ॥286॥

पूरा अध्याय