ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 285285.2श्रीरामचरितमानस 285.2जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात। जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात ॥284॥पिछलापूरा अध्याय