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श्रीरामचरितमानस 282.2

प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।
बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु ॥281॥

पूरा अध्याय