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श्रीरामचरितमानस 276.2

गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।
अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ ॥275॥

पूरा अध्याय