Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 275.2

सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु ॥274॥

पूरा अध्याय