Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 273.2

मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ॥272॥

पूरा अध्याय