ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 266266.2श्रीरामचरितमानस 266.2गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि। मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि ॥265॥पिछलापूरा अध्याय