Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 264.2

संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।
गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार ॥263॥

पूरा अध्याय