Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 258.2

देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।
भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर ॥257॥

पूरा अध्याय