ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 249249.2श्रीरामचरितमानस 249.2गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि।। लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि ॥248॥पिछलापूरा अध्याय