ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 248248.2श्रीरामचरितमानस 248.2एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल। तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल ॥247॥पिछलापूरा अध्याय