ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 238238.2श्रीरामचरितमानस 238.2जनमु सिंधु पुनि बंधु बिषु दिन मलीन सकलंक। सिय मुख समता पाव किमि चंदु बापुरो रंक ॥237॥पिछलापूरा अध्याय