ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 232232.2श्रीरामचरितमानस 232.2करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान। मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान ॥231॥पिछलापूरा अध्याय