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श्रीरामचरितमानस 225.2

सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।
तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात ॥224॥

पूरा अध्याय