Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 223.2

नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि।
यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि ॥222॥

पूरा अध्याय