ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 208208.2श्रीरामचरितमानस 208.2देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान। धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान ॥207॥पिछलापूरा अध्याय