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दोहा 20

20.1

चौपाई

बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।
बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो।।
महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू।।
महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।।
जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू।।
सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी।।
हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को।।
नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

20.2

दोहा/सोरठा

बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास।।
राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास ॥19॥

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