ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 190190.2श्रीरामचरितमानस 190.2तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।। परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ ॥189॥पिछलापूरा अध्याय