ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 186186.2श्रीरामचरितमानस 186.2सुनि बिरंचि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर। अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर ॥185॥पिछलापूरा अध्याय