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श्रीरामचरितमानस 182.2

छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ।
तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ ॥181॥

पूरा अध्याय