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श्रीरामचरितमानस 180.2

कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।
मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ ॥179॥

पूरा अध्याय