ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 177177.2श्रीरामचरितमानस 177.2उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप। तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप ॥176॥पिछलापूरा अध्याय