Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 173.2

नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।
बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत ॥172॥

पूरा अध्याय