ग्रंथश्रीरामचरितमानसबालकाण्डदोहा 172172.2श्रीरामचरितमानस 172.2राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि। लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि ॥171॥पिछलापूरा अध्याय